देहरादून।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के सभी 13 जनपदों में निरंतर जनसेवा शिविर आयोजित कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेशभर में अब तक 395 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। इन शिविरों के माध्यम से 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। ये आंकड़े राज्य सरकार की संवेदनशीलता, प्रशासनिक तत्परता और जनसमस्याओं के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
शिविरों के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए। इसके साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री धामी की उस सोच को साकार करती है, जिसमें शासन को जनता के निकट लाकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना प्रमुख उद्देश्य है।
यदि जनपदवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जनपदों में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता दर्ज की गई।
देहरादून जनपद में जहां 41,889 नागरिकों ने शिविरों में भाग लिया, वहीं हरिद्वार में 64,686 नागरिकों ने इस पहल का लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त ऊधम सिंह नगर में 24,421 तथा अल्मोड़ा में 24,771 नागरिकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु है, जो उत्तराखण्ड में सुशासन की मजबूत नींव रख रहा है।




