नई दिल्ली: देश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, खासकर महिलाओं के खिलाफ। हाल ही में मलयालम फिल्म अभिनेत्री के साथ साइबर दुर्व्यवहार का मामला सामने आया, जिसमें फेसबुक पोस्ट पर अश्लील टिप्पणियां की गईं। इस मामले में 27 लोगों पर केस दर्ज किया गया और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
लेकिन यह सिर्फ एक मामला नहीं है। महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में महिलाओं से जुड़े 2,25,001 से अधिक साइबर अपराध दर्ज किए गए हैं। इनमें अश्लील सामग्री शेयर करना, साइबर स्टॉकिंग, पहचान की चोरी, ई-मेल फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं शामिल हैं।
साइबर अपराध के बढ़ते आंकड़े चिंताजनक
वर्ष 2020 में 56,283 ऑनलाइन अपराध दर्ज किए गए थे, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 72,301 तक पहुंच गया। 2022 में 1,31,634, 2023 में 1,41,264, और 2024 में 1,56,938 साइबर अपराध दर्ज किए गए, जो दर्शाता है कि इस तरह की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। वरिष्ठ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रकाश सिंह ने कहा, “महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। सरकार इस पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठा रही है, लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।”
सरकार की नई पहल और कड़े कदम
गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (CCPWC) योजना’ के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी है। इसमें साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना, साइबर विशेषज्ञों की भर्ती और पुलिस कर्मियों व न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने जैसे कदम शामिल हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (NCFL) की स्थापना मई 2022 में हैदराबाद में की गई थी। इस प्रयोगशाला के माध्यम से साइबर अपराध से जुड़े मामलों में तेजी से साक्ष्य जुटाए जाएंगे और जांच की प्रक्रिया को 50% तक तेज किया जाएगा।
I4C और साइट्रेन पोर्टल से बढ़ेगी साइबर सुरक्षा
सरकार ने Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) के तहत ‘साइट्रेन’ (CyTrain) पोर्टल विकसित किया है, जिसमें साइबर अपराध जांच, फोरेंसिक और अभियोजन से संबंधित ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए गए हैं। अभी तक 1,02,321 से अधिक पुलिस अधिकारी इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, और 79,909 से अधिक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
एनसीआरपी पर दर्ज हुए लाखों मामले
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 2020 से 2024 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों के लाखों मामले दर्ज किए गए हैं।
- बाल यौन शोषण (CP/CSAM) से जुड़े मामले:
- 2020 में 2,019 मामले, 2021 में 2,109, 2022 में 3,062, 2023 में 2,957, और 2024 में 6,079 मामले दर्ज हुए।
- बलात्कार और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले:
- 2020 में 2,184 मामले, 2021 में 27,945, 2022 में 30,574, 2023 में 12,129, और 2024 में 4,273 मामले रिपोर्ट किए गए।
- अश्लील सामग्री प्रसार के मामले:
- 2020 में 17,985 मामले, 2021 में 21,994, 2022 में 28,588, 2023 में 24,980, और 2024 में 38,123 मामले दर्ज किए गए।
देश में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि सरकार साइबर अपराधों को रोकने के लिए फोरेंसिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल प्रशिक्षण और कड़े कानूनों के माध्यम से मजबूत कदम उठा रही है, लेकिन इस समस्या का समाधान सख्त कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों की जागरूकता बढ़ाने में ही निहित है। महिलाओं को सतर्क रहने और साइबर अपराध से बचाव के लिए डिजिटल सुरक्षा के उपाय अपनाने की जरूरत है।