हिमालयी इलाकों में बर्फबारी से जमे झरने और नदियां
उत्तराखंड में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में हुई बर्फबारी ने तापमान माइनस में पहुंचा दिया है। बद्रीनाथ और गंगोत्री जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पानी की सप्लाई लाइन जम गई है, और गंगा के जमने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। झरने और नदियां सुबह-शाम जम जाती हैं, जबकि दिन में धूप के कारण फिर से पानी बहने लगता है।
पर्यटकों और किसानों को राहत, लेकिन बर्फबारी पर्याप्त नहीं
देर से हुई बर्फबारी ने पर्यटन कारोबारियों और किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, लेकिन निचले हिमालयी क्षेत्रों में अब तक कोई खास बर्फबारी नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी भी पहाड़ों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
ठंड के बीच जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ीं
जहां एक तरफ नदियां और झरने जम रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ठंड और बर्फबारी के बीच जंगलों में आग की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। अल्मोड़ा और पौड़ी जिलों में बीते 10 दिनों में कई बार जंगल धधक उठे। पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा के कसार देवी के जंगलों में आग ने रिहायशी इलाकों तक खतरा बढ़ा दिया।
कसार देवी के जंगलों में तीन दिन तक धधकती रही आग
अल्मोड़ा के सीरिया पानी इलाके में कसार देवी के जंगलों में सोमवार से बुधवार तक लगातार तीन दिन आग धधकती रही। फायर ब्रिगेड, वन विभाग, और एसडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मौसम विभाग: नए साल पर होगी बर्फबारी
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में बर्फबारी के लिए अभी एक हफ्ते का इंतजार करना होगा। 26 दिसंबर के बाद बारिश और बर्फबारी की संभावना है, जिससे नए साल पर पर्यटक स्थलों पर मौसम खुशनुमा रहने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी
जंगलों में आग की घटनाएं और बर्फबारी की देरी पर्यावरणीय असंतुलन की ओर इशारा करती हैं। प्रशासन और स्थानीय लोगों को जंगलों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।