नई नौकरियों का उभरता क्षेत्र
2030 तक नौकरी के बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और ग्रीन ट्रांजिशन के बदलते रुझानों से 170 मिलियन नई नौकरियों के निर्माण का अनुमान है, जबकि 92 मिलियन मौजूदा नौकरियों का स्थानांतरण होगा।
तेजी से बढ़ते क्षेत्र
डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और प्रौद्योगिकी आधारित नौकरियां सबसे अधिक तेजी से बढ़ेंगी। साथ ही, डिलीवरी ड्राइवर, शिक्षक और कृषि क्षेत्र में भी नौकरियों में इजाफा होगा। बढ़ते डिजिटल ट्रेंड और हरित ऊर्जा प्रयासों ने इन क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है।
कौशल की बदलती मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक तकनीकी और मानवीय कौशल का मेल जरूरी होगा। लगभग 40% नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल बदलने की संभावना है। AI, बड़े डेटा, और साइबर सुरक्षा में विशेषज्ञता की मांग तेजी से बढ़ रही है।
भारत का योगदान और चुनौतियां
भारत में डिजिटल क्रांति, भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन प्रयासों के चलते नौकरियों का भविष्य तय होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि AI कौशल की मांग में भारत अग्रणी है। हालांकि, विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों की राय
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर श्रीपदा ने कहा कि नई तकनीकों का स्वागत होना चाहिए, लेकिन ऑटोमेशन के कारण नौकरी जाने की स्थिति में कौशल विकास का रोडमैप तैयार करना होगा।
नई नौकरियों के लिए प्रमुख क्षेत्र
- तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र: AI और मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, डेटा विश्लेषक, सॉफ्टवेयर डेवलपर।
- हरित ऊर्जा और पर्यावरण: नवीकरणीय ऊर्जा इंजीनियर, पर्यावरण इंजीनियर।
- कोर सेक्टर: शिक्षक, खेतिहर मजदूर, डिलीवरी ड्राइवर।
घटने वाली नौकरियां
- बैंक टेलर और क्लर्क
- डेटा एंट्री और प्रशासनिक सहायक
- टेलीमार्केटर और डाक सेवा क्लर्क
आगे की राह
रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि नई तकनीकों के अनुकूल कौशल विकास और शिक्षा में निवेश से इन बदलावों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। सरकार और उद्योगों को मिलकर नई नौकरियों के निर्माण और कार्यबल के पुनर्प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा।
2030 तक, यह परिवर्तन केवल नौकरी के परिदृश्य को नहीं बदलेगा, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।