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झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 24 फरवरी से, भाजपा की अनुपस्थिति रही चर्चा का केंद्र

Budget session of Jharkhand assembly from February 24, BJP's absence was the center of discussion

रांची: झारखंड विधानसभा का षष्ठम बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सदन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सर्वदलीय बैठक आयोजित की, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, वित्त सह संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, जदयू विधायक सरयू राय, लोजपा (आर) विधायक जनार्दन पासवान, राजद विधायक सुरेश पासवान और जेएलकेएम विधायक जयराम कुमार महतो शामिल हुए।

हालांकि, इस बैठक में मुख्य विपक्षी दल भाजपा की कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं था, जिससे यह विषय चर्चा का केंद्र बना। इसके अलावा, आजसू और भाकपा माले के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल नहीं हुए।

भाजपा की अनुपस्थिति पर विधानसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

भाजपा की बैठक में अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कहा,
“सदन सभी का है और इसके सुचारू संचालन की जिम्मेदारी भी सभी की बनती है। व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं, लेकिन आसन (विधानसभा अध्यक्ष) सभी दलों के सहयोग की अपेक्षा करता है। सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष गाड़ी के दो पहिए के समान होते हैं।”

उन्होंने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ विधायक सी.पी. सिंह को बैठक की जानकारी पत्र के माध्यम से दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सदन को सुचारू रूप से संचालित करने पर सहमति बनी है, लेकिन भाजपा की अनुपस्थिति पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि भाजपा की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में मुख्यमंत्री का चुनाव समय पर हो सकता है, तो झारखंड में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में देरी क्यों हो रही है?

एनडीए में शामिल लोजपा (आर) के विधायक जनार्दन पासवान ने भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे का जवाब केवल भाजपा ही दे सकती है

बजट सत्र का कार्यक्रम और चर्चा की रूपरेखा

बैठक के दौरान बजट सत्र को लेकर कई अहम फैसले लिए गए:

  • बजट पर एक दिन की जगह दो दिन तक वाद-विवाद होगा
  • अनुदान मांगों पर चर्चा के लिए 11 दिन के बजाय 10 दिन निर्धारित किए गए
  • अगर किसी विशेष विषय पर चर्चा की आवश्यकता होगी, तो कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस पर विचार किया जाएगा
  • बजट 3 मार्च को पेश किया जाएगा, जबकि 4 और 5 मार्च को बजट पर वाद-विवाद होगा।

क्या भाजपा विधानसभा की कार्यवाही से दूरी बना रही है?

भाजपा की इस बैठक में अनुपस्थिति और नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या भाजपा विधानसभा में अपनी रणनीति के तहत दूरी बना रही है, या फिर यह आंतरिक गुटबाजी का संकेत है? आगामी बजट सत्र में इस पर और स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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