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Uttarakhand: अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में मौजूद महाभारत काल के भीम के पद चिह्न: पौराणिक कथाओं से जुड़ी अद्भुत धरोहर

Footprints of Bhima of Mahabharata period present in Salt area of ​​Almora: Amazing heritage related to mythology

उत्तराखंड: जिसे देवभूमि कहा जाता है, अपने प्राचीन पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विशेष पहचान रखता है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में स्थित भीम के पद चिह्न, महाभारत काल की एक ऐसी अद्वितीय विरासत है, जो हजारों साल पुरानी कथाओं को सहेजे हुए है। इस स्थान को लेकर मान्यता है कि जब पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र से गुजरे थे, तो भीम ने यहां अपने पैर के निशान छोड़े थे।

नौखुचियां क्षेत्र में भीम के पद चिह्न की अद्भुत संरचना

अल्मोड़ा जिले के सल्ट के मोलेखाल से 2 किलोमीटर आगे नौखुचियां क्षेत्र में एक विशालकाय पद चिह्न बना हुआ है, जिसकी संरचना पैर के आकार की है। इस चिह्न में पैर की उंगलियां स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। इसे लेकर यह दावा किया जाता है कि यह भीम के पैरों के निशान हैं, जो उन्होंने महाभारत काल के दौरान यहां विश्राम करते समय छोड़े थे।

सराईखेत में दूसरा पद चिह्न

नौखुचियां के अलावा, सराईखेत में भी एक और स्थान है, जहां भीम के दूसरे पद चिह्न की बात कही जाती है। यह स्थान नौखुचियां से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है, जहां मां मानिला देवी मंदिर और भीम के पद चिह्न यहां की पहचान को और विशिष्ट बनाते हैं।

स्थानीय लोगों की मान्यता

खेत मालिक राजीव का कहना है कि उनके बुजुर्गों ने यह पद चिह्न देखा था और माना था कि यह भीम का ही निशान है। उनका दावा है कि इतना बड़ा पैर किसी अन्य मनुष्य का नहीं हो सकता। स्थानीय निवासियों का भी मानना है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां से गुजरते हुए इस चिह्न को छोड़ा था, और यह उनके महाभारत कालीन यात्रा का प्रमाण है।

पंडितों की पुष्टि और संरक्षण की मांग

विद्वान पंडित डीसी हरबोला का भी कहना है कि पांडव अज्ञातवास के समय उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर चुके थे। उनका मानना है कि भीम का यह पद चिह्न उसी समय का प्रमाण हो सकता है। पंडित हरबोला ने पुरातत्व विभाग से इस धरोहर के संरक्षण की मांग की है ताकि इस अद्भुत पौराणिक स्थान को भविष्य में भी सहेजा जा सके।

निष्कर्ष

भीम के इन पद चिह्नों को लेकर स्थानीय लोगों और पंडितों की मान्यताएं और पौराणिक कथाएं देवभूमि उत्तराखंड की ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर को और समृद्ध करती हैं। यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि महाभारत जैसे महान कालखंड से भी इसका गहरा संबंध है। पुरातत्व विभाग द्वारा इसके संरक्षण की दिशा में कार्य किया जाना आवश्यक है ताकि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।

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