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उत्तराखंड-नेपाल के रिश्तों में नई कड़ी: काली नदी पर बना पहला मोटर पुल तैयार

A new link in Uttarakhand-Nepal relations: The first motor bridge on Kali river is ready

पिथौरागढ़: उत्तराखंड और नेपाल को जोड़ने वाला देश का पहला मोटर पुल बनकर तैयार हो गया है। काली नदी पर बने इस पुल से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। उत्तराखंड सरकार द्वारा इस पुल का निर्माण 32 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया है। इसके बाद पिथौरागढ़ के छारछुम और नेपाल के दारचुला के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।

दो देशों को जोड़ने वाला अनूठा पुल

उत्तराखंड सरकार ने 2021 में इस पुल के निर्माण की नींव रखी थी। यह 110 मीटर लंबा पुल न केवल वाहनों की आवाजाही के लिए तैयार किया गया है, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए सर्विस लेन भी दी गई है। इस पुल के माध्यम से नेपाल को एशियन हाईवे से जोड़ा जाएगा। खास बात यह है कि उत्तराखंड सरकार नेपाल की सीमा में 180 मीटर लंबी एप्रोच रोड भी बना रही है, जिससे पुल पर आवागमन और सुगम हो सके।

व्यापार और धार्मिक यात्रा को मिलेगा बढ़ावा

पुल के निर्माण से उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत जैसे जिलों को व्यापारिक दृष्टि से बड़ा लाभ होगा। वहीं, नेपाल के दारचुला और कंचनपुर जिले भी इससे सीधे लाभान्वित होंगे। पुल के माध्यम से न केवल व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए भी यह एक बड़ा उपहार साबित होगा। अब श्रद्धालु अपनी गाड़ियों से सीधे उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों तक पहुंच सकेंगे।

भारत-नेपाल संबंधों में आएगी मधुरता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। इस पुल से इन रिश्तों में और भी प्रगाढ़ता आएगी। नेपाल और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों को बेहतर व्यापार और यात्रा की सुविधाएं मिलेंगी।

सुरक्षा और निगरानी के लिए तैनात होंगी एजेंसियां

पुल के पास एसएसबी की चौकी बनाई जा रही है, जहां सुरक्षा बलों और कस्टम विभाग की तैनाती होगी। यहां हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जाएगी। यह क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम होगा।

अगले साल से होगी आवाजाही शुरू

हालांकि, पुल पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके चालू होने के लिए 2025 तक इंतजार करना पड़ेगा। एप्रोच रोड का निर्माण पूरा होने के बाद बड़े और छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। यह उत्तराखंड और नेपाल के बीच का पहला ऐसा पुल होगा, जो मोटर वाहनों के लिए उपयुक्त होगा।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने इसे दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा, “यह पुल सिर्फ भौतिक जुड़ाव का नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के आपसी रिश्तों को और गहराई देने का प्रतीक है।”

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