हरिद्वार: महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। देशभर के शिवालयों में भक्त भगवान भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर रहे हैं। हर तरफ बम-बम भोले के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी कारण इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में विशेष पूजा-अर्चना के साथ मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने माता पार्वती को वचन दिया था कि वह उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे। पहले शिव ने माता पार्वती की तपस्या से उनकी परीक्षा ली, फिर विवाह के लिए सहमति दी। यही कारण है कि इस दिन को शिव और पार्वती के मिलन के रूप में मनाया जाता है।
फाल्गुन मास की शिवरात्रि का विशेष महत्व
पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है और इसका विशेष महत्व होता है। इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
सालभर में होती हैं 12 शिवरात्रियां
हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। इस तरह वर्ष में कुल 12 शिवरात्रियां होती हैं, लेकिन फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत रखा जाता है।
भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय
भगवान शिव को प्रसन्न करना सबसे आसान माना जाता है। ज्योतिषाचार्य मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि भगवान भोलेनाथ क्षण भर में रूठ जाते हैं और क्षण भर में ही मान भी जाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस पूजा में अलग-अलग सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है। सामान्य रुद्राभिषेक में उपयोग होने वाली सामग्री से पांच गुना अधिक सामग्री महाशिवरात्रि पर प्रयोग की जाती है। इस दौरान भगवान शिव के 1008 नामों का पाठ किया जाता है, जिससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
पूरी रात दूध, दही, शहद और गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। साथ ही, भांग, धतूरा और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं, क्योंकि ये सभी चीजें भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय हैं। इस प्रकार महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।