हैदराबाद: भारत जैव विविधता का अद्भुत उदाहरण है, जहां पारंपरिक फसलों के साथ कई दुर्लभ पेड़ों की भी खेती होती है। इनमें से एक है अगरवुड, जिसे वैज्ञानिक नाम से एक्विलारिया मैलाकेंसिस के नाम से जाना जाता है। इस लकड़ी का बाजार मूल्य 2-3 लाख रुपये प्रति किलो तक है, और इससे तैयार होने वाला इत्र (सेंट) तो सोने से भी अधिक मूल्यवान है।
अगरवुड की लकड़ी को विशेष तरीके से सड़ाकर इससे इत्र, अगरबत्ती, एयर फ्रेशनर, प्यूरीफायर, और दवाइयाँ बनाई जाती हैं। पूर्वोत्तर के मणिपुर, असम, नागालैंड, और त्रिपुरा राज्यों के अलावा, अब तेलुगू प्रदेशों में भी इसकी खेती की जा रही है। इसके उत्पाद की विदेशों में भारी मांग है, और इसकी खेती से किसान कम समय में लाखों की कमाई कर सकते हैं।
अगरवुड की खेती: खासियत और लाभ
अगरवुड की लकड़ी में फफूंद के कारण सुगंध पैदा होती है, जिससे यह पेड़ खास और मूल्यवान बन जाता है। पेड़ को फफूंद लगने पर इसमें एक विशेष राल जैसा पदार्थ उत्पन्न होता है, जो लकड़ी को सुगंधित करता है। इस लकड़ी से बने उत्पादों की मांग अरब देशों में बहुत अधिक है।
तेजी से कमाई का जरिया
श्रीगंधम और लाल चंदन के पेड़ों की तरह, अगरवुड भी महंगे पेड़ों में गिना जाता है। लेकिन जहां श्रीगंधम और लाल चंदन के पेड़ों को आमदनी देने में 30 साल लगते हैं, वहीं अगरवुड की खेती से सिर्फ चार साल में आमदनी शुरू हो जाती है। एक पेड़ से करीब तीन किलो लकड़ी के चिप्स निकलते हैं, जिनकी प्रति किलो कीमत एक लाख रुपये से तीन लाख रुपये तक होती है।
अगरवुड का तेल: महंगा और बहुपयोगी
अगरवुड का तेल भी बेहद मूल्यवान होता है। क्वालिटी के आधार पर इसका एक लीटर तेल 30 से 70 लाख रुपये तक बिकता है। इस तेल का इस्तेमाल दवाओं और मलहम बनाने में होता है, और इसकी सबसे ज्यादा मांग अरब देशों में है।
अगरवुड की पत्तियों के फायदे
अगरवुड की पत्तियां भी काफी उपयोगी होती हैं। इन्हें सुखाकर हरी चाय के पत्तों की तरह उपयोग किया जाता है, जिससे बनी चाय सेहत के लिए फायदेमंद होती है। यह तनाव कम करने, पाचन सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
अगरवुड निर्यात पर नए कोटा की शुरुआत
हालांकि, अगरवुड के निर्यात पर CITES के तहत कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि इसकी अंधाधुंध कटाई से बचा जा सके। अप्रैल 2024 से भारत ने अगरवुड की लकड़ी और तेल के निर्यात पर एक नया कोटा लागू किया है, जिसके तहत सालाना 1,51,080 किलो लकड़ी और 7,050 किलो तेल का निर्यात किया जा सकेगा।
अगरवुड की खेती न केवल किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है, बल्कि यह सुगंध और स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न उत्पादों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।