देहरादून: उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने के बाद इसे लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी भ्रामक जानकारियां तेजी से फैल रही हैं, वहीं दूसरी ओर नैनीताल हाईकोर्ट ने यूसीसी के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई अलमसुद्दीन और भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को छह हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप क्लॉज पर विवाद
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र की अध्यक्षता में नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य रूप से यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है। इसके अलावा, मुस्लिम, पारसी और अन्य समुदायों की पारंपरिक वैवाहिक व्यवस्था की अनदेखी का भी हवाला दिया गया है।
राज्य सरकार का रुख स्पष्ट: सुबोध उनियाल
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि किसी भी नए कानून के लागू होने पर शुरुआती दौर में कुछ आपत्तियां और चुनौतियां आना स्वाभाविक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा साफ है और यह कदम ऐतिहासिक रूप से पूरे देश में अपनी तरह का पहला उदाहरण है। हालांकि, अगर किसी विशेष प्रावधान को लेकर कोई ठोस आपत्ति सामने आती है, तो सरकार इस पर विचार करने के लिए तैयार है।
सीएम धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यूसीसी को लेकर न्यायालय में सरकार की ओर से उचित जवाब पेश किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू किया। इस फैसले के बाद से ही विभिन्न संगठनों और समुदायों की ओर से इसे अदालत में चुनौती देने की संभावना जताई जा रही थी। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार अपने जवाब में क्या दलीलें पेश करती है।