मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति अब तक नहीं बन पाई है। एकनाथ शिंदे ने खुद को इस दौड़ से अलग कर लिया है, लेकिन उनकी पार्टी और अन्य घटक दलों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है।
गुरुवार रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर महायुति के तीन बड़े नेताओं, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस, और अजित पवार के साथ बैठक हुई। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे। बैठक के बाद भी मुख्यमंत्री पद और विभागों के बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
गृह विभाग पर टकराव
एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने की स्थिति में उनकी पार्टी गृह और शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी चाहती है। हालांकि, भाजपा ने गृह विभाग पर अपना दावा जताया है। इससे पहले 2014 में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री रहते हुए गृह विभाग अपने पास रखा था और इस बार भी भाजपा इस मंत्रालय को छोड़ने के पक्ष में नहीं है।
वित्त मंत्रालय पर अजित पवार की नजर
उधर, एनसीपी नेता अजित पवार, जो उपमुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं, वित्त मंत्रालय को लेकर जोर दे रहे हैं। हालांकि, मंत्रालयों के बंटवारे में सहमति न बनने से मंत्रिमंडल गठन प्रक्रिया में देरी हो रही है।
मराठा आंदोलन और मुख्यमंत्री पद का समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर मराठा आरक्षण की संवेदनशीलता अहम भूमिका निभा सकती है। भाजपा के नेता विनोद तावड़े, जिन्हें अचानक दिल्ली बुलाकर अमित शाह ने चर्चा की, इस समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर मराठा समुदाय से मुख्यमंत्री बनाया गया तो यह आंदोलन को शांत करने में मददगार हो सकता है।
अगली बैठक में हल की उम्मीद
बैठक के बाद एकनाथ शिंदे ने कहा कि चर्चा सकारात्मक रही और अगली बैठक मुंबई में होगी। हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री पद पर फैसला अटका हुआ है। महायुति के नेताओं के बीच जारी इस खींचतान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।