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भूमध्यसागर से बढ़ते भारत के रिश्ते: रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी का नया दौर

India's growing ties with the Mediterranean: A new era of strategic, economic and cultural partnership

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को रोम में आयोजित “भूमध्यसागरीय वार्ता 2024” में भारत और भूमध्यसागर के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र को भारत की भू-राजनीतिक और आर्थिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। जयशंकर ने कहा कि भारत का इस क्षेत्र के साथ वार्षिक व्यापार लगभग 80 बिलियन डॉलर है और यहां बसे 4.6 लाख भारतीय प्रवासी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बना रहे हैं।

भारत-भूमध्यसागर: ऐतिहासिक संबंधों की नई प्रासंगिकता

भूमध्यसागर, जो दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच फैला हुआ है, ऐतिहासिक रूप से भारत के लिए व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा है। यूसनस फाउंडेशन थिंक टैंक के संस्थापक अभिनव पंड्या ने बताया कि प्राचीन काल में भारत का रोमन साम्राज्य और यूनान के साथ व्यापारिक संबंध था। मसालों, हीरों और सोने के लिए प्रसिद्ध भारत का मालाबार तट इस संबंध का मुख्य केंद्र था।

हालांकि, आज इन संबंधों ने भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से और भी गहराई पा ली है। ग्रीस, इटली और इज़राइल जैसे देश भारत के लिए रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहे हैं।

रक्षा और कनेक्टिविटी में बढ़ता सहयोग

जयशंकर ने अपने भाषण में बताया कि भारत और भूमध्यसागर क्षेत्र के बीच रक्षा अभ्यास और सैन्य सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) का उल्लेख किया, जिसे हाल के वर्षों का “गेम चेंजर” माना जा रहा है। IMEEC, जो एशिया, फारस की खाड़ी और यूरोप के बीच संपर्क को बढ़ाने का काम करेगा, भारत को खाड़ी और भूमध्यसागरीय देशों से जोड़ने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा, “यह गलियारा यूरोप तक भारतीय निर्यात के लिए एक वैकल्पिक और तेज मार्ग प्रदान करेगा।”

ग्रीस के पिरियस बंदरगाह को इस गलियारे के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। हाल ही में ग्रीस और भारत के मंत्रियों ने इस बंदरगाह की क्षमताओं और यूरोपीय बाजारों तक भारतीय सामानों की पहुंच को लेकर बातचीत की थी।

इटली और भारत के उभरते संबंध

इटली, जो हाल तक चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा था, ने अब इससे बाहर निकलकर भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। पिछले साल इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।

इटली के साथ भारत की 2025-29 रणनीतिक कार्य योजना व्यापार, विज्ञान, तकनीक, रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

भारत और ग्रीस: साझा रणनीतिक दृष्टिकोण

ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस की हालिया भारत यात्रा में दोनों देशों ने आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और रक्षा में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। ग्रीस और भारत के साझा हित, जैसे इस्लामिक आतंकवाद से निपटना और साइबर खतरों का सामना करना, दोनों देशों को एकजुट कर रहे हैं।

IMEEC: एक नया आर्थिक युग

सितंबर 2023 में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया गया IMEEC, एशिया और यूरोप के बीच संपर्क को मजबूत करेगा। इसमें रेलवे, शिपिंग और सड़क परिवहन मार्ग शामिल होंगे। जयशंकर ने कहा कि यह गलियारा भारत और भूमध्यसागर क्षेत्र के संबंधों में नई जान फूंकेगा और व्यापार को और सुलभ बनाएगा।

भारत की भू-राजनीतिक पहुंच का विस्तार

जयशंकर ने कहा कि भूमध्यसागर की 600 बंदरगाहों और वैश्विक समुद्री व्यापार में 25% हिस्सेदारी इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। भारत अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति को पश्चिम तक फैलाकर इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।

निष्कर्ष

भूमध्यसागर, जो इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापारिक जुड़ाव का केंद्र रहा है, आज भारत के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बन गया है। IMEEC जैसी परियोजनाएं, ग्रीस और इटली जैसे देशों के साथ मजबूत होते संबंध, और रक्षा एवं तकनीक में सहयोग, यह सब दर्शाते हैं कि भारत-भूमध्यसागर संबंधों का भविष्य उज्ज्वल है।

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