भगवान जगन्नाथ के पूजन में फूलों की महत्वपूर्ण भूमिका
पुरी (ओडिशा): भगवान जगन्नाथ को फूलों से विशेष प्रेम है, इसलिए उन्हें गुलाब, कमल, चंपा, तुलसी और अन्य सुगंधित फूलों की मालाओं से सजाया जाता है। श्रीमंदिर में पूरे दिन देवताओं के लिए विभिन्न बेशा (वेशभूषा) होती हैं, जिसमें विशेष प्रकार की पुष्प माला और आभूषणों का उपयोग किया जाता है। रात के समय बड़ा सिंघारा बेशा के दौरान सबसे अधिक फूलों का उपयोग होता है।
मंदिर परिसर में फूलों की आपूर्ति में गिरावट
पहले मंदिर परिसर में स्थित कोइली बैकुंठ और नीलाचल उद्यान मंदिर की फूलों की आवश्यकताओं को पूरा करते थे, लेकिन अब यह आपूर्ति कम हो गई है। बढ़ती मांग को देखते हुए मंदिर प्रशासन को बाहरी स्रोतों और भक्तों के दान पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सेवादारों की मांग – मंदिर की भूमि को मुक्त कराकर बगीचा बढ़ाया जाए
मंदिर के सेवादारों ने प्रशासन से फूलों के बगीचे का विस्तार करने की मांग की है। उनका कहना है कि मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे हटाकर इसे बगीचे के लिए उपयोग में लाया जाए। सेवादारों ने प्रशासन को कई पत्र भेजे, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
फूलों की कमी पर मंदिर प्रशासन और सेवादारों के अलग-अलग दावे
- सेवादारों का आरोप: मंदिर प्रशासन फूलों की कमी की समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। यदि उचित कार्रवाई की जाती तो मंदिर की ज़मीन पर फूलों के बगीचे विकसित किए जा सकते थे।
- मंदिर प्रशासन का जवाब: मंदिर में फूलों की कोई कमी नहीं है। जरूरत पड़ने पर मंदिर के माली विभिन्न उद्यानों और स्रोतों से फूल एकत्र करते हैं। आने वाले समय में नीलाचल उपवन और कोइली बैकुंठ को बहाल करने की योजना है।
भगवान जगन्नाथ की फूलों से विशेष सजावट
भगवान जगन्नाथ को आठ प्रकार के पुष्प आभूषण और माला पहनाई जाती हैं, जिनमें करपल्लव, कुंडल, चंद्रका, अधरमाला, कौस्तुभ पदक, झुम्पा आदि शामिल हैं। विशेष बात यह है कि मंदिर में चढ़ाई जाने वाली फूलों की मालाओं में धागे की गांठ नहीं होती।
निष्कर्ष
फूलों की आपूर्ति को लेकर सेवादारों और मंदिर प्रशासन के बीच मतभेद बना हुआ है। जहां सेवादार मंदिर की भूमि को मुक्त कराकर बगीचे के विस्तार की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि फूलों की कोई कमी नहीं है और आगे बगीचों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालना आवश्यक है ताकि भगवान जगन्नाथ की परंपरागत पुष्प सेवा बाधित न हो।