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महापर्व छठ: छठ पूजा का तीसरा दिन, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की विशेष पूजा

Third day of Chhath Puja, special worship of offering Arghya to the setting sun

बिहार, उत्तर प्रदेश, और नेपाल में मनाए जाने वाले महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन का आज (7 नवंबर) विशेष महत्व है। यह दिन संध्या अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है, जब महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रत करती हैं। छठ पूजा का यह तीसरा दिन, जिसे “डूबते सूर्य को अर्घ्य देने” का दिन कहा जाता है, इस पूजा के मुख्य दिनों में से एक है। महिलाएं इस दिन पूरे दिन निराहार व्रत रखती हैं और सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करती हैं, ताकि उनके परिवार और खासकर बच्चों की दीर्घायु बनी रहे।

छठ पूजा का तीसरा दिन: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस साल छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर को नहाय-खाय से हुई थी, और आज (7 नवंबर) पूजा का तीसरा दिन मनाया जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, यह तिथि 7 नवंबर को सुबह 12:41 बजे से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 12:34 बजे तक रहेगी। इस दिन का सबसे अहम समय सूर्यास्त है, जब महिलाएं अर्घ्य अर्पित करती हैं। संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त 7 नवंबर को सूर्यास्त के समय है, जो अलग-अलग शहरों में निम्नलिखित रहेगा:

– नई दिल्ली: 5:32 PM
– पटना: 5:04 PM
– रांची: 5:07 PM
– कोलकाता:t 4:56 PM
– मुंबई: 6:02 PM
– अहमदाबाद: 5:58 PM
– हैदराबाद: 5:42 PM
– जयपुर: 5:40 PM
– लखनऊ: 5:19 PM
– रायपुर: 5:24 PM

पूजा-अनुष्ठान और विशेष व्रत

छठ पूजा के तीसरे दिन महिलाएं संतान सुख और अपने परिवार की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। दिन भर का व्रत रखने के बाद, संध्या समय में वे जलाशय, नदी, या तालाब के किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस पूजा में बांस की टहनियों में फल, मिठाइयां और ठेकुआ भरकर पानी में डाला जाता है। इसके साथ ही, छठी मैया को भी प्रसाद चढ़ाया जाता है, और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

इस दिन की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह एकमात्र समय है जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस अनुष्ठान को करते हैं, और यह विश्वास करते हैं कि सूर्य देव के आशीर्वाद से उनके परिवार में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

तीसरे दिन का महत्व

छठ पूजा का तीसरा दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाएं इस दिन पवित्रता की भावना से भरपूर रहती हैं और सूर्य देवता तथा छठी मैया की पूजा करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करती हैं। इस दिन घरों में विशेष पकवान जैसे ठेकुआ, चावल की खीर और अन्य मौसमी व्यंजन तैयार किए जाते हैं। पूजा के बाद इन व्यंजनों को भक्तों में वितरित किया जाता है।

छठ पूजा के इस महापर्व का समापन अगले दिन (8 नवंबर) उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है। इस दिन को पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जाता है, और यह पर्व समाज में एकता और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देता है।

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