डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर
नई दिल्ली: अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में गुरुवार को रुपये में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे कमजोर होकर 86.56 पर बंद हुआ। रुपये में गिरावट का कारण विदेशी कोषों की निकासी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, और वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती को बताया गया है।
रुपये का दिनभर का उतार-चढ़ाव
रुपया 86.42 पर खुला और 86.37 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। हालांकि, कारोबार के अंत में यह 86.56 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह बुधवार के बंद भाव 86.40 के मुकाबले 16 पैसे की गिरावट को दर्शाता है।
आयातकों की डॉलर मांग से बढ़ा दबाव
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने बताया कि आयातकों द्वारा डॉलर की लगातार बढ़ती मांग के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा, “डॉलर-रुपये का हाजिर भाव 86.35 से 86.75 रुपये के बीच रहने की उम्मीद है।”
डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल का हाल
अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05% की बढ़त के साथ 108.97 पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 0.12% गिरकर 81.93 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
शेयर बाजार में तेजी
घरेलू शेयर बाजार ने इस गिरावट के प्रभाव को थोड़ा कम किया। बीएसई सेंसेक्स 318.74 अंक बढ़कर 77,042.82 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 98.60 अंक की तेजी के साथ 23,311.80 पर पहुंचा।
एफआईआई की बिकवाली का असर
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 4,533.49 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे रुपये पर और दबाव पड़ा।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के मद्देनजर डॉलर और कच्चे तेल में अस्थिरता बनी रह सकती है। इससे रुपये पर आगे भी दबाव बने रहने की संभावना है।