नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत एक बार फिर विपक्ष और सरकार के बीच तीखे टकराव से हुई। सत्र के पहले दिन ही संभल हिंसा, मणिपुर की स्थिति, और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग संसद को अपने एजेंडे के हिसाब से चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को सकारात्मक चर्चा में भाग लेने की नसीहत दी। इसके बावजूद विपक्ष संभल हिंसा जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की अपनी मांग पर अड़ा रहा।
संभल हिंसा पर गरमाया माहौल
सम्भल हिंसा को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और उनके खिलाफ दर्ज कथित झूठी एफआईआर को खारिज करने की मांग की। उन्होंने इसे “राजनीतिक साजिश” करार देते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सरकार का सख्त रुख, विपक्ष की चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने विपक्ष की सभी मांगों को ठुकराने का संकेत दिया है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में लोकसभा स्पीकर ने साफ किया कि संसद में बैनर और पोस्टर का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद में सार्थक बहस होनी चाहिए, न कि बेवजह का हंगामा।
हालांकि, विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि वह संभल, मणिपुर और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने से पीछे नहीं हटेगा। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अहम मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है।
संविधान दिवस के मौके पर नरमी की उम्मीद
मंगलवार को संविधान दिवस के कारण विपक्ष के रुख में थोड़ी नरमी की संभावना है। इसके बावजूद संभल हिंसा और मणिपुर जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बरकरार रहने की संभावना है।
सत्र के भविष्य पर सवाल
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही संसद का कामकाज प्रभावित होता नजर आ रहा है। विपक्ष के आक्रामक रवैये और सरकार की सख्ती के बीच यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ सकता है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने विधायी कार्य पूरे करने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे विपक्ष वॉकआउट करे या बहस से दूरी बनाए रखे।
संसद का यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच तल्खी का नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में संसद में सकारात्मक बहस का माहौल बनता है या फिर यह सत्र भी महज हंगामे की भेंट चढ़ जाता है।