नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने बुधवार को एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की। यह साझेदारी भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं को तेज़ी से बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
गौरतलब है कि यह घोषणा भारती एयरटेल द्वारा स्पेसएक्स के साथ भारत में स्टारलिंक इंटरनेट सेवा शुरू करने के समझौते के ठीक एक दिन बाद आई है। एयरटेल की इस घोषणा के बाद टेलीकॉम सेक्टर में हलचल तेज हो गई थी, और अब जियो के इस कदम से प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ सकती है।
क्या है यह समझौता और क्यों है अहम?
रिलायंस जियो और स्टारलिंक के इस समझौते का उद्देश्य भारत के दूर-दराज और इंटरनेट से वंचित क्षेत्रों में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट उपलब्ध कराना है। पारंपरिक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उन इलाकों तक नहीं पहुंच पाती, जहां बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हुआ है। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट एक बड़ा समाधान हो सकता है।
इस साझेदारी के तहत जियो, भारत में स्टारलिंक की टेक्नोलॉजी का उपयोग करके सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सेवाएं शुरू कर सकता है। इससे ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में भी तेज़ इंटरनेट सेवा पहुंचाने में मदद मिलेगी।
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
एयरटेल और जियो दोनों ही अब सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर चुके हैं, जिससे भारत में इंटरनेट सेवाओं की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। एयरटेल पहले ही स्पेसएक्स के साथ करार कर चुका है और अब जियो ने भी स्टारलिंक के साथ हाथ मिला लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को ज्यादा तेज़ और किफायती इंटरनेट सेवाएं मिल सकती हैं।
क्या होगा असर?
- ग्रामीण भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ेगी
- टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ होगी
- डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा मिलेगा
अब देखना यह होगा कि रिलायंस जियो और स्टारलिंक की यह साझेदारी भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री में क्या नया बदलाव लेकर आती है और उपभोक्ताओं को इससे कितना फायदा होगा।