नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने असम, मिजोरम और नागालैंड में अलर्ट जारी करते हुए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को मणिपुर हिंसा के संभावित प्रभावों को रोकने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इन राज्यों को मणिपुर के साथ अपनी सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस कार्य में राज्य सरकारों की मदद कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि मणिपुर के कुकी और मैतेई समुदाय के लोग इन राज्यों में भी निवास करते हैं।
सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी
मणिपुर के जिरीबाम जिले और असम के कछार जिले की सीमा पर सुरक्षा उपायों को बढ़ा दिया गया है। असम पुलिस ने नदी के किनारे गश्त सहित चौबीसों घंटे सीमा पर निगरानी शुरू कर दी है। कछार पुलिस ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर कहा कि बराक नदी के किनारे निरंतर गश्त और रणनीतिक सड़क मार्च के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत किया गया है। जिरी नदी पुल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गश्त की जा रही है।
मिजोरम और नागालैंड में शरणार्थियों की स्थिति
मणिपुर में हिंसा के कारण 7,000 से अधिक लोग मिजोरम के विभिन्न हिस्सों में और करीब 6,000 लोग नगालैंड में शरण लिए हुए हैं। मिजोरम का चम्फाई जिला और नागालैंड का फेक जिला मणिपुर के साथ सीमाएं साझा करते हैं। पिछले वर्ष 3 मई को मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के बाद अधिकांश कुकी-जोमी-हमार-मिजो समुदाय के लोग मिजोरम और नागालैंड की ओर पलायन कर गए थे।
सरकारी प्रयास और जनजातीय संगठनों की मांग
हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बीच, जनजातीय एकता समिति ने भारत सरकार से क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की है। समिति ने अल्पसंख्यक कुकी-जो समुदाय के संवैधानिक संरक्षण और राजनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
ताजा घटनाएं
हाल ही में बराक नदी में एक मैतेई महिला का शव बरामद होने की घटना ने तनाव और बढ़ा दिया है। असम और मणिपुर सीमा पर सुरक्षा बल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों के इन प्रयासों का उद्देश्य हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखना और संभावित अशांति को रोकना है।