आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन तेजी से बदलती जीवनशैली और तकनीकी प्रगति के कारण बच्चों और टीनएजर्स पर मानसिक दबाव काफी बढ़ गया है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में करीब 5 करोड़ से अधिक 13 से 18 वर्ष के किशोर किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं। इस बढ़ती समस्या के पीछे कई कारक हैं, जिनमें सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, पारिवारिक मुद्दे, पढ़ाई का दबाव, और हिंसा या दुर्व्यवहार शामिल हैं।
विशेषज्ञों का नजरिया
एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष, डॉ. जीडी कूलवाल ने बताया कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि माता-पिता को बच्चों के साथ अधिक संवाद स्थापित करना चाहिए और उन्हें खुलकर बोलने का मौका देना चाहिए। इससे बच्चे अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कर सकते हैं और मानसिक तनाव का शिकार होने से बच सकते हैं।
किशोरों की परवरिश में ध्यान रखने योग्य बातें:
1. दोस्त बनकर संवाद करें:
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार बनाए रखना जरूरी है ताकि वे अपनी समस्याएं परिवार के साथ साझा कर सकें। यदि बच्चों को परिवार का सहयोग नहीं मिलता, तो वे मानसिक तनाव में आ सकते हैं, जिससे उनका आचरण भी बदलने लगता है।
2. सोशल मीडिया पर नियंत्रण:
सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। डॉ. कूलवाल के अनुसार, माता-पिता को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नजर रखनी चाहिए और उनका मोबाइल इस्तेमाल नियंत्रित करना चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि बच्चे सही सामग्री देख रहे हों और सोशल मीडिया का उपयोग एक सीमित समय के लिए हो।
3. खुलकर बात करने का अवसर दें:
बच्चों को बोलने और अपनी जिज्ञासाओं को व्यक्त करने का अवसर देना बेहद जरूरी है। माता-पिता को उनके सवालों को नेगेटिव तरीके से नहीं लेना चाहिए, बल्कि पॉजिटिव दृष्टिकोण से गाइड करना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे कैसे बढ़ रहे हैं
भारत में किशोरों की बड़ी आबादी मानसिक स्वास्थ्य के गंभीर मुद्दों का सामना कर रही है। 2015-16 के *राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण* के अनुसार, 13-17 वर्ष के 7% बच्चे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों से प्रभावित हैं। कोविड-19 महामारी ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, और इन समस्याओं से ग्रसित किशोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
समाधान और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों को उनकी काउंसलिंग करनी चाहिए। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से समय पर संपर्क करना भी आवश्यक है। इन छोटे-छोटे प्रयासों से बच्चों का मानसिक विकास सही दिशा में हो सकता है और वे किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी से बच सकते हैं।