नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने के लिए भेजने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ओवैसी ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्य है, जो वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और उसके सहयोगी संगठन मस्जिदों और दरगाहों को लेकर विवाद उत्पन्न कर रहे हैं, जो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों को दर्शाता है।
सिर्फ प्रतीकात्मक काम से कुछ नहीं होगा: ओवैसी
ओवैसी ने कहा, “चादर चढ़ाने से कुछ नहीं होने वाला है। बीजेपी और संघ परिवार के लोग दरगाहों और मस्जिदों पर विवाद खड़ा कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि ये मस्जिदें और दरगाहें नहीं हैं, वे खुदाई की मांग कर रहे हैं।” ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी से यह आग्रह किया कि अगर वे सच में चाहते हैं तो इन विवादों को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दस सालों में बीजेपी की सरकार के दौरान सात से अधिक मस्जिदों और दरगाहों को लेकर विवाद उठ चुके हैं।
मुसलमानों के खिलाफ अत्याचारों का मुद्दा उठाया
ओवैसी ने आगे कहा कि मुसलमानों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों को लेकर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्यों दरगाहों और मस्जिदों पर लगातार हमले हो रहे हैं और क्यों इन मुद्दों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
लद्दाख और संभल हिंसा पर टिप्पणी
ओवैसी ने चीन द्वारा लद्दाख में दो नए काउंटी बनाने पर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चीन से डरकर केवल निवेश के लिए उससे पैसे मांग रही है। इसके अलावा, ओवैसी ने संभल हिंसा पर भी चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि प्रशासन विशेष समुदाय को निशाना बना रहा है।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू का बयान
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी के भाईचारे के संदेश को दोहराया। रिजिजू ने कहा था कि वह इस अवसर पर “भाग्यशाली” महसूस कर रहे हैं और पीएम मोदी का संदेश लाए हैं, जिसमें देश और विश्व शांति के लिए काम करने की बात की गई थी। रिजिजू ने दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह का भी दौरा किया था और वहां भी चादर चढ़ाई थी।
निष्कर्ष:
ओवैसी की प्रतिक्रिया इस ओर इशारा करती है कि उन्होंने पीएम मोदी के प्रतीकात्मक कृत्य को वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के तौर पर देखा है। उनका कहना है कि जब तक सरकार वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं देती, तब तक ऐसे प्रतीकात्मक कार्यों से कोई बदलाव नहीं होगा।