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उत्तराखंड में ग्लेशियर का चमत्कार: धौली गंगा बेसिन का बेनाम ग्लेशियर बढ़ा रहा अपना दायरा

Miracle of glacier in Uttarakhand: The nameless glacier of Dhauli Ganga basin is expanding its scope

ग्लोबल वॉर्मिंग के बीच एक अलग कहानी: बेनाम ग्लेशियर का आकार बढ़ रहा
जहां एक ओर दुनिया भर के ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वहीं उत्तराखंड के धौली गंगा बेसिन में स्थित एक बेनाम ग्लेशियर ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। इस ग्लेशियर का दायरा साल-दर-साल बढ़ रहा है।

863 मीटर तक बढ़ा ग्लेशियर का आकार: सैटेलाइट डेटा ने किया खुलासा
वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 से अक्टूबर 2019 के बीच बेनाम ग्लेशियर ने 863.49 मीटर का क्षेत्र सर्ज किया। यह अध्ययन सैटेलाइट डेटा के आधार पर किया गया है।

सर्ज ग्लेशियर का रहस्य: वैज्ञानिकों की नजर में यह अद्वितीय घटना
ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. मनीष मेहता के मुताबिक, यह ग्लेशियर एडवांस नहीं हो रहा, बल्कि सर्ज प्रकार के व्यवहार के कारण अपना क्षेत्र बढ़ा रहा है। इसके पीछे हाइड्रोलॉजिकल और जियोलॉजिकल कारण हो सकते हैं।

ग्लेशियर सर्ज: क्या हैं इसके वैज्ञानिक कारण?
ग्लेशियर के आधार पर पानी का दबाव, तापमान में वृद्धि और बेसिन में छोटे जलाशयों का बनना, इस सर्ज का कारण हो सकते हैं। जियोलॉजिकल परिस्थितियों के चलते बेस में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ने से ग्लेशियर आगे खिसक रहा है।

बर्फबारी की कमी के बावजूद बढ़ रहा है आकार: क्या कहता है अध्ययन?
धौली गंगा बेसिन में पिछले 10-20 सालों में भारी बर्फबारी नहीं हुई है। इसके बावजूद ग्लेशियर का दायरा बढ़ना, थर्मल कंट्रास्ट और हाइड्रोलॉजिकल घटनाओं का परिणाम हो सकता है।

वैज्ञानिक अध्ययन से मिली नई उम्मीद: आपदा प्रबंधन में होगा उपयोग
यह शोध ग्लेशियरों के व्यवहार और आपदाओं के खतरों को समझने में मदद करेगा। बेनाम ग्लेशियर पर किए गए इस अध्ययन से ग्लेशियर सर्ज के पीछे के कारणों को बेहतर तरीके से जाना जा सकेगा।

ग्लेशियर सर्ज पर आगे की योजना: गहराई से होगी रिसर्च
डॉ. मनीष मेहता ने बताया कि क्षेत्र में पहुंच की सीमाओं के कारण यह शोध अभी सैटेलाइट डेटा तक सीमित है। आगे गहराई से अध्ययन कर सर्ज ग्लेशियरों के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जाएगा।

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