पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले के युवा किसान अब खेती में नए-नए प्रयोग कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। विदेशी सब्जी जुकिनी की खेती से न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि बाजार में इसकी बढ़ती मांग ने उन्हें स्थानीय और बाहरी राज्यों में भी पहचान दिलाई है।
जुकिनी: एक विदेशी सब्जी, पोषण से भरपूर
जुकिनी, जिसे तोरी या तुरई भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर है। यह सब्जी विटामिन ए, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह न केवल आंखों, हड्डियों और त्वचा के लिए फायदेमंद है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल, बीपी और डायबिटीज जैसी बीमारियों में भी लाभकारी है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर जुकिनी त्वचा को जवां बनाए रखने और झुर्रियों को रोकने में मदद करती है।
पूर्णिया के युवा किसान शशि भूषण का अनोखा प्रयास
पूर्णिया के किसान शशि भूषण ने विदेशी सब्जी जुकिनी की खेती शुरू की। शुरू में उन्हें इसे बेचने में परेशानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे स्वाद और पोषण के कारण लोग इसे पसंद करने लगे। अब यह सब्जी सीमांचल, बंगाल और झारखंड तक सप्लाई की जा रही है।
शशि भूषण बताते हैं कि लखनऊ से बीज लाने के बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ से तकनीकी जानकारी ली। फिलहाल, वह पूर्णिया जिले के पहले किसान हैं जो वृहद स्तर पर जुकिनी की खेती कर रहे हैं।
मुनाफा और उत्पादन की कहानी
जुकिनी की खेती में एक कट्ठा जमीन पर 2,000-3,000 रुपये की लागत आती है, लेकिन इससे 8,000-10,000 रुपये की कमाई हो सकती है। एक पौधे से 5-6 किलो तक सब्जी मिलती है, जो बाजार में 100-200 रुपये प्रति किलो बिकती है। शशि भूषण महीने में 1-2 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।
बाजार में बढ़ती मांग
पूर्णिया के मोहम्मद निजामुद्दीन बताते हैं कि यह सब्जी पहले केवल विदेशों में उगाई जाती थी, लेकिन अब इसे स्थानीय स्तर पर उगाकर विभिन्न राज्यों में बेचा जा रहा है। इसकी पौष्टिकता और स्वाद के कारण बाजार में इसकी मांग बढ़ती जा रही है।
किसान बन रहे प्रेरणा स्रोत
शशि भूषण जैसे किसान नई तकनीकों और विदेशी सब्जियों की खेती से अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका यह प्रयास न केवल उनकी आय को बढ़ा रहा है, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रहा है।
निष्कर्ष: जुकिनी जैसी विदेशी सब्जियों की खेती ने पूर्णिया के किसानों को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर दिया है। यह पहल खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाने की प्रेरणा देती है।