शिरडी (अहिल्यानगर): महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में संगमनेर सीट पर एक बड़ा उलटफेर हुआ है। साइबर कैफे चलाने वाले और किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमोल खताल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बालासाहेब थोरात को हराकर सभी को चौंका दिया।
साधारण जीवन से राजनीति की ऊंचाई तक का सफर
अमोल खताल का राजनीति में कोई पृष्ठभूमि नहीं थी। संगमनेर तालुका के धांदरफल खुर्द गांव के निवासी खताल ने संगमनेर में एक साधारण साइबर कैफे से अपने करियर की शुरुआत की। छात्रों के आवेदन भरने और स्थानीय लोगों के ऑनलाइन कामों में मदद करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर काम करना शुरू किया।
विखे पाटिल के मार्गदर्शन में उभरी नेतृत्व क्षमता
राजनीति में कदम रखने के बाद, खताल ने राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और पूर्व सांसद डॉ. सुजय विखे पाटिल के साथ मिलकर काम किया। जल्द ही वे संगमनेर तालुका में विखे पाटिल के सबसे भरोसेमंद व्यक्ति बन गए। सामाजिक मुद्दों को उठाने और योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने की उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया।
जनसमस्याओं पर विशेष ध्यान
अमोल खताल ने संजय गांधी निराधार पेंशन योजना को सफलतापूर्वक लागू कर तालुका के गरीब लोगों को इसका लाभ दिलाया। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं और किसानों की समस्याओं पर काम किया। संगमनेर को जिला बनाने की मांग को लेकर उन्होंने भूख हड़ताल भी की।
विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत
चुनाव से पहले, खताल को महायुति (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) का उम्मीदवार बनाया गया। अपने प्रचार अभियान में उन्होंने सड़कों और पानी की समस्याओं को केंद्र में रखा। जनता से सीधे संपर्क और जमीनी मुद्दों पर ध्यान देने के चलते उन्होंने बालासाहेब थोरात जैसे दिग्गज नेता को हराने में कामयाबी हासिल की।
एक नई उम्मीद के तौर पर उभरे खताल
अमोल खताल की यह जीत न केवल संगमनेर, बल्कि पूरे राज्य में एक नई चर्चा का विषय बन गई है। राजनीति में बिना पृष्ठभूमि के इतना बड़ा मुकाम हासिल करना उनकी मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है।