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भारत में 20 करोड़ इमारतें भूकंपीय क्षेत्र में, भूकंपरोधी बनाने की जरूरत – NDMA

20 crore buildings in India are in seismic zones, need to be made earthquake resistant – NDMA

नई दिल्ली: नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी (NDMA) ने मंगलवार को कहा कि भारत में करीब 20 करोड़ इमारतें भूकंपीय क्षेत्र 4 और 5 में आती हैं, जिससे उनमें भूकंप का गंभीर खतरा है। NDMA ने इन इमारतों को भूकंपरोधी बनाने के लिए सुधार करने पर जोर दिया है।

पुरानी इमारतों में भूकंप का खतरा अधिक – NDMA

NDMA के सदस्य कृष्ण एस वत्स ने बताया कि इनमें से कई इमारतें 30-40 साल पुरानी हैं और राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) का पालन नहीं करती हैं। ऐसे में इन इमारतों को सुरक्षित बनाने के लिए संरचनात्मक और भूकंपीय सुधार करने की जरूरत है।

भारत के भूकंपीय क्षेत्र

भारत में भूकंपीय क्षेत्र 4 और 5 सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र हैं।

 भूकंपीय क्षेत्र 5 (अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र):

  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश का पश्चिमी भाग, उत्तराखंड का पूर्वी हिस्सा
  • गुजरात (कच्छ क्षेत्र), बिहार का उत्तरी हिस्सा, पूर्वोत्तर राज्य और अंडमान-निकोबार द्वीप

 भूकंपीय क्षेत्र 4 (उच्च जोखिम क्षेत्र):

  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश का उत्तरी हिस्सा, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान का पश्चिमी भाग

दिल्ली में भूकंप का खतरा अधिक

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) के प्रोफेसर PSN राव ने कहा कि दिल्ली में 1760 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जहां गैर-इंजीनियरिंग इमारतें बनी हैं, जो भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम नहीं हैं।

  • राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) के दिशानिर्देशों का पालन जरूरी।
  • असुरक्षित इमारतों की पहचान कर उन्हें मजबूत बनाना होगा।

राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) क्या है?

नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया (NBC) देशभर में भवन निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।

  • NBC का पालन सभी सरकारी, निजी और स्थानीय निकायों के लिए आवश्यक है।
  • भूकंपरोधी निर्माण के लिए NBC में स्पष्ट मानक दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन पर सरकार का जोर

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के कार्यकारी निदेशक राजेंद्र रत्नू ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं को भूकंपरोधी बनाने की जरूरत है।

  • राज्यों को आपदा संसाधन नेटवर्क (IDRN) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (EEWS) विकसित करने की जरूरत।
  • जन जागरूकता अभियान शुरू कर लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

NDMA ने आपदा-प्रतिरोधी भारत के लिए 7 प्रमुख बिंदु दिए

NDMA के सदस्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का 59% भूभाग भूकंपीय क्षेत्र III, IV और V के अंतर्गत आता है। उन्होंने भूकंप प्रतिरोधी भारत बनाने के लिए 7 प्रमुख रणनीतियों पर जोर दिया।

भवन संहिता (NBC) को सख्ती से लागू करना।
महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण।
भूकंपीय इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता विकसित करना।
भूकंप प्रभाव आकलन पैमाने का विकास।
राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों और उनके कार्यान्वयन को मजबूत करना।
जन जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना।
भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (EEWS) को प्राथमिकता देना।

भारत में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों को देखते हुए, अब यह जरूरी हो गया है कि नई इमारतों को भूकंपरोधी बनाया जाए और पुरानी इमारतों को सुदृढ़ किया जाए।

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